अश्लेषा का घेरा और आने वाली अमावस्या
आज चंद्रमा अश्लेषा नक्षत्र के अंतिम चरण में है। ये वो ऊर्जा है जो सीधी नहीं, बल्कि सर्प की तरह बलखाती है। जब भी मैं ऐसे समय में कुंडली देखती हूँ, मुझे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। 22 मई की ये स्थिति साधारण नहीं है।
चंद्रमा का ये अंतिम पड़ाव हमेशा कुछ अधूरा छोड़ जाता है।
लोग अक्सर पूछते हैं कि 'प्रिया, ये घबराहट क्यों है?' मैं उनसे कहती हूँ कि ये हमारे पूर्वजों का अधूरा हिसाब है जो केतु, मघा में बैठकर मांग रहा है। कुंभ राशि में बैठा राहु भी पुरानी आदतों को छोड़ने पर मजबूर कर रहा है।
अभी वट सावित्री का व्रत आने वाला है। लोग इसे सिर्फ पति की लंबी उम्र का उत्सव मानते हैं, पर असल में ये जड़ें मजबूत करने का समय है। आप बरगद की परिक्रमा करते हैं तो असल में अपनी आत्मा की परिक्रमा कर रहे होते हैं।
अगर आप अपनी उलझनों का सही समय जानना चाहते हैं, तो 'VedKal' पर चौघड़िया देखना न भूलें। हर काम का एक मुकर्रर वक्त होता है।
मेरे लिए, ये समय रोशनी का नहीं है। ये समय उस अँधेरे को समझने का है जो आपकी कुंडली के उन खानों में छिपा है, जहाँ शनि और राहु ने डेरा डाल रखा है।
सचेत रहिए। आने वाला समय बड़ा गहरा है।
Celestial Responses (1)