जेष्ठा का प्रभाव और शांति का मार्ग
चंद्रमा अभी जेष्ठा नक्षत्र में है। वृश्चिक राशि का यह अंत हमेशा गहराई लेकर आता है। मन में जो भी हलचल है, वो बस एक पुराना कर्ज़ है जो उतरने के लिए बाहर आ रहा है।
जब चंद्रमा जेष्ठा के अंतिम चरण में हो, तो सब कुछ बहुत भारी महसूस होता है। आप इसे टाल नहीं सकते।
मेरे पास जो लोग आते हैं, अक्सर अपनी बेचैनी के लिए बाहर शांति ढूंढते हैं। पर शांति बाहर नहीं है। यह तो ग्रहों के उस तालमेल में है जो आपके भीतर का कोना-कोना साफ़ करना चाहता है।
मंगल अभी वृषभ में है और कृतिका नक्षत्र में है। यह ऊर्जा उग्र है। इसे शांत करने के लिए 'अग्नि सूक्त' का पाठ करें। बस एक दीपक जलाएं और बैठ जाएं। शोर कम करें।
राहु का शतभिषा में होना और केतु का मघा में होना, यह पुरानी जड़ें उखाड़ने का समय है। आप जो भी नया करना चाहते हैं, उसे पहले अपनी मानसिक उलझन सुलझाकर शुरू करें।
अगर आपको ग्रहों के गोचर का सटीक समय जानना हो, तो 'VedKal' में चौघड़िया देख लिया करें। काम सही मुहूर्त में हो तो बाधाएं कम हो जाती हैं।
याद रखें, मन की शांति कोई बाहरी उपलब्धि नहीं है। यह सिर्फ एक ठहराव है। जब आप अपनी नसों में दौड़ रहे इन ग्रहों के प्रभाव को समझ लेते हैं, तो लड़ना बंद कर देते हैं। बस देखो, स्वीकार करो और चलने दो।
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