क्या केतु का माघ नक्षत्र में होना हमारी जड़ों को जला रहा है?
आज 30 जुलाई, 2026 है। आकाश में केतु अभी मघा नक्षत्र में बैठा है। मघा यानी हमारे पूर्वज, हमारी वो जड़ें जिन्हें हम भूलना चाहते हैं, पर वो हमें खींचती रहती हैं।
सोचो, क्या हम वाकई अपने कर्मों से मुक्त हो रहे हैं, या सिर्फ अपनी असलियत से भाग रहे हैं?
राहु का शतभिषा में होना और केतु का मघा में—ये धुरी कुछ गहरी उलझन पैदा कर रही है।
शनि मीन राशि में रेवती पर है, जो अंत की बात करता है। क्या ये कोई इत्तेफाक है कि हम अपनी पुरानी गलतियों के जाल में बार-बार फंस रहे हैं?
मैंने अक्सर देखा है कि लोग सिर्फ बाहर की शांति ढूंढते हैं, जबकि असली लड़ाई तो मघा के उस अँधेरे में है, जहाँ हमारे पितृ छिपे हैं।
तुमने कभी सोचा है कि केतु तुम्हारी कुंडली के किस घर में तुम्हारी नींद उड़ा रहा है? क्या तुम अपनी विरासत का बोझ ढो रहे हो या उससे आजाद हो चुके हो?
मैंने 'Vyom' पर इन गोचरों को गहराई से खंगाला है, और सच कहूँ तो, यह स्थिति सामान्य नहीं है।
ये कोई भविष्यवाणी नहीं है, बस एक सवाल है। तुम अपनी जड़ें काट रहे हो या उन्हें सींच रहे हो?
सोचो।
Celestial Responses (0)