क्या केतु का साया सचमुच अतीत का हिसाब है?
आज आसमान की स्थिति कुछ अलग इशारा कर रही है। केतु अभी मघा नक्षत्र में है, और शुक्र भी वहीं बैठा है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है। पुराने कर्म, वो बातें जिन्हें हम भुला चुके हैं, अब सामने आ रही हैं। कभी सोचा है कि राहू हमें आगे भागने को कहता है, पर केतु हमें पीछे की गलतियों में उलझा देता है? यह सिर्फ ग्रह नहीं हैं, ये हमारे अवचेतन की वो दीवारें हैं जिन्हें हम तोड़ नहीं पाते। जब केतु शुक्र के साथ है, तो क्या हमारे पुराने रिश्तों का दर्द फिर से उभर रहा है? क्या हम सच में आगे बढ़ रहे हैं या बस वही पुरानी कहानी बार-बार दोहरा रहे हैं? मुझे लगता है, हम अक्सर अपनी ही छाया से डरते हैं। आपकी कुंडली में केतु कहाँ खड़ा है? क्या वो आपको शांत कर रहा है या फिर से पुराने घावों को कुरेद रहा है? सोचिए, क्या आप वाकई आजाद होना चाहते हैं या उस पुराने कर्ज को ढोना ही नियति है? बताइए, आपके लिए केतु का ये पड़ाव क्या लेकर आया है?
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