अतीत का बोझ और केतु की छाया
आजकल मन बहुत भारी है, है ना? केतु मघा नक्षत्र में बैठा है, और यह पुराने कर्मों का हिसाब मांग रहा है। जब हम अपनी जड़ों से कट जाते हैं, तो असुरक्षा अपने आप घर बना लेती है। यह गोचर सिर्फ ग्रहों का खेल नहीं है, यह आपके भीतर की बेचैनी का आईना है। अगर आप खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं, तो रुकिए। अतीत के उन लोगों को माफ कर दीजिए, जिन्हें आप अब तक पकड़े हुए हैं। ये जंजीरें आपकी आत्मा को आगे नहीं बढ़ने दे रहीं।
एक छोटा सा उपाय है। हर शनिवार सूर्यास्त के बाद, काले तिल किसी बहते हुए पानी में प्रवाहित करें। बस चुपचाप, बिना किसी अपेक्षा के। यह कर्मों के बोझ को हल्का करने का एक तरीका है। अगर आप अपनी कुंडली की गहराई को समझना चाहते हैं, तो 'Vedkal' पर जाकर अपनी स्थिति देखें। समय की नब्ज पहचानना ही समझदारी है। ज्यादा सोचिए मत, बस छोटे कदम उठाना शुरू करें। शांति बाहर नहीं, आपके भीतर के उस खालीपन को भरने में है। आज से ही शुरुआत करें, क्योंकि कल का इंतज़ार सिर्फ समय की बर्बादी है।
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