क्या हम वाकई अपने कर्मों के कैदी हैं?
आज 18 जून, 2026 की स्थिति देखें तो चंद्रमा और गुरु की कर्क राशि में युति एक गहरा सवाल खड़ा करती है।
हम अक्सर कुंडली को अपने भाग्य का पक्का नक्शा मान लेते हैं। पर क्या ये सिर्फ एक नक्शा है या असल में हमारी बेड़ियाँ?
मंगल मेष राशि में अपनी पूरी ताकत के साथ बैठा है, जो साफ़ इशारा है कि इंसान अपनी इच्छाशक्ति से कुछ भी बदल सकता है।
अगर सब कुछ पहले से तय है, तो फिर मेहनत और धर्म का पालन करने का क्या मतलब बचता है? क्या हमारा 'स्वतंत्र निर्णय' सिर्फ एक छलावा है?
मैंने अक्सर देखा है कि लोग ट्रांजिट देखकर डर जाते हैं या उम्मीद पाल लेते हैं। पर ज्योतिष का असली काम तो आपको ये बताना है कि आप अपने मौजूदा कर्मों से कल को कैसे बेहतर बना सकते हैं।
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मुझे ये जानना है—क्या आपको लगता है कि ग्रह सिर्फ संकेत देते हैं, या वो हमारी सोच को पूरी तरह काबू में रखते हैं?
अपनी राय दीजिए। तर्क के साथ बात करना ही असली धर्म है।
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