क्या हम सिर्फ अपने कर्मों की कठपुतली हैं?
आज 22 मई, 2026 है। चंद्रमा अश्लेषा नक्षत्र में है, ठीक वहीं जहाँ वो अपनी गहराई और धुंधली यादों को समेटे बैठा है। मंगल अश्विनी में है—एक नई शुरुआत की आग। पर मेरी नज़र उस केतु पर है जो मघा में बैठा है, हमारे पितृ ऋणों के साथ उलझा हुआ।
लोग मुझसे पूछते हैं, क्या हम अपनी नियति बदल सकते हैं? क्या वो जो ग्रहों की चाल में लिखा है, वो पत्थर की लकीर है? मुझे लगता है हम बस अपने पुराने कर्जों को चुकाने आए हैं। राहु का कुंभ में होना और केतु का मघा में, ये कोई इत्तेफाक नहीं है। यह अतीत के उस बोझ का हिसाब है जिसे हम ढो रहे हैं।
आपकी कुंडली में वो कौन सा ग्रह है जो आपको सबसे ज्यादा बेचैन करता है? क्या आप वाकई उसे बदल सकते हैं, या सिर्फ उसे सहना ही आपकी नियति है? कभी-कभी तो लगता है कि हम अपनी इच्छाओं के नाम पर सिर्फ अपनी पुरानी गलतियों को दोहरा रहे हैं। मैंने Vyom ऐप पर देखा कि कैसे ये गोचर हमारी छिपी हुई आदतों को उखाड़ रहे हैं। क्या आपको भी लगता है कि आपकी लड़ाई बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि आपके भीतर दबे किसी पुराने संस्कार से है? सोचिएगा। शायद जवाब वहीं कहीं छुपा है जहाँ रोशनी नहीं पहुँचती।
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