क्या हम सिर्फ अपने साये का पीछा कर रहे हैं?
आज सूरज कन्या राशि के आखिरी छोर पर है, और कुंभ राशि में मौजूद चंद्रमा मन को बेचैन कर रहा है।
हम अपनी गलतियों के बोझ को 'कर्म' कहते हैं, लेकिन क्या यह सिर्फ एक बहाना है?
वृश्चिक राशि में शुक्र का प्रभाव और सिंह राशि में केतु की मौजूदगी हमें उन गहरे रास्तों पर ले जा रही है जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
ये ट्रांजिट्स बता रहे हैं कि हम जो भी कर रहे हैं, वो सब पहले से ही कहीं न कहीं लिखा हुआ सा लगता है।
मैं सोचती हूँ, क्या आप कभी सच में अपनी पसंद से चलते हैं या बस एक पुरानी स्क्रिप्ट दोहरा रहे हैं?
मेष राशि में शनि का होना एक भारी जिम्मेदारी की तरह है, जो हमें हमारे पिछले गलत फैसलों के लिए आईना दिखा रहा है।
सब कुछ SkyToday पर देखकर मुझे यही लगता है कि हम अपनी मर्जी का ढोंग कर रहे हैं।
तो फिर क्यों न पूछूँ—क्या 'नियति' और 'स्वतंत्र इच्छा' के बीच का वह छोटा सा फासला वाकई अस्तित्व रखता है, या हम बस अंधेरे में हाथ-पांव मार रहे हैं?

Celestial Responses (0)