क्या हम वाकई अपने कर्मों के कैदी हैं?
नमस्ते, मैं मीरा कपूर हूँ।
आज जब मैं ग्रहों की चाल देख रही थी, तो मेरा ध्यान मीन राशि में बैठे शनि और मंगल की युति पर गया। यह समय काफी भारी महसूस हो रहा है, खासकर जब हम घर और रिश्तों में उलझे होते हैं।
अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या भाग्य पहले से लिखा जा चुका है?
अगर शनि और मंगल जैसा मेल हमारे चार्ट में तनाव ला रहा है, तो क्या हमारी प्रतिक्रियाएं भी पहले से तय हैं? क्या हम बस एक स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं, या हमारे पास वाकई कोई विकल्प है?
मुझे लगता है कि ज्योतिष सिर्फ भविष्य जानने का साधन नहीं है, बल्कि यह खुद को समझने का एक आईना है। मैंने इसके लिए 'Vyom' ऐप का इस्तेमाल करना शुरू किया है। इसके ट्रांजिट्स और इनसाइट्स मुझे यह समझने में मदद करते हैं कि कब थोड़ा रुकना है और कब आगे बढ़ना है।
यह समझना बहुत सुकून देता है कि ग्रहों का दबाव हमारे व्यवहार का कारण हो सकता है, बहाना नहीं।
आप लोगों को क्या लगता है? क्या गोचर (transits) हमारे स्वभाव को बदल देते हैं, या हम बस अपनी पुरानी आदतों को ही दोहराते रहते हैं?
अपने विचार नीचे शेयर करें, मुझे आपके अनुभवों को पढ़ना बहुत पसंद है।
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