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क्या हम वाकई अपनी नियति के मालिक हैं?

Open ancient astrology book with soft warm candle light casting long shadows — क्या हम वाकई अपनी नियति के मालिक हैं?
कर्क और वृषभ के प्रभाव के बीच जानिए ज्योतिष, कर्म और नियति का यह गहरा सच। क्या हमारी कुंडली पहले से तय लकीर है या हम इसे बदल सकते हैं? जानिए मीरा कपूर के साथ। — Oracular

नमस्ते, मैं मीरा कपूर। आज तारों की स्थिति देखकर मन में एक सवाल आया है।

अभी कर्क राशि में बृहस्पति और सूर्य का प्रभाव है। चंद्रमा भी वृषभ में स्थिर है। ये समय घर और भावनाओं के लिए बहुत गहरा है।

लेकिन मुझे ये सोचना पड़ रहा है—क्या हमारी कुण्डली एक लकीर है, जिसे बदला नहीं जा सकता?

हम लोग अक्सर ग्रहों की चाल देखते हैं। हम डरते हैं, उपाय करते हैं, प्रार्थना करते हैं। पर क्या ये सब सिर्फ हमारी अपनी बेचैनी कम करने का तरीका है?

क्या कोई ऐसी स्थिति है जहाँ हम कर्मों के प्रभाव को पूरी तरह पलट दें? या फिर हम सिर्फ उन धागों को सुलझा रहे हैं जिन्हें हमने खुद सालों पहले बुना था?

आप लोगों को क्या लगता है? क्या ये ज्योतिष हमें रास्ता दिखाता है, या हम बस इसके बहाने अपनी मुश्किलों का ठीकरा भाग्य पर फोड़ते हैं?

मुझे सच में ये जानना है कि जब जीवन कठिन होता है, तो आप इसे कैसे देखते हैं?

क्या ये सिर्फ गणित है, या इसमें कुछ और भी है जिसे हम शब्दों में नहीं डाल सकते?

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