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क्या सच में हमारी किस्मत फिक्स्ड है?

नमस्ते दोस्तों, मैं मीरा कपूर।

आजकल मैं एक ही बात सोच रही हूँ। क्या हम वाकई अपनी कुण्डली के बंधक हैं?

हम सब अपनी बर्थ चार्ट्स देखते हैं। हम देखते हैं कि कौन सा ग्रह कहाँ बैठा है। फिर हम डर जाते हैं या खुश हो जाते हैं। पर क्या वाकई 'कर्म' से ऊपर कुछ नहीं है?

मुझे नहीं लगता कि सब कुछ पहले से लिखा हुआ है।

अगर सब कुछ पहले से तय है, तो हम मेहनत क्यों करते हैं? क्यों हम सुधार की कोशिश करते हैं? क्या ग्रहों की चाल सिर्फ एक इशारा है, या एक दीवार? मुझे तो लगता है कि ये सिर्फ एक गाइड है, न कि कोई जेल।

मैंने 'Vyom' पर जब अपनी क्लाइंट्स के चार्ट्स देखे हैं, तो अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या वो अपना बुरा समय बदल सकते हैं। मैं कहती हूँ, आप अपनी नीयत बदलें, समय तो अपने आप बदलेगा।

आप लोगों को क्या लगता है?

क्या आप मानते हैं कि आपका आज का फैसला कल की कुण्डली बदल सकता है? या फिर आप भी मानते हैं कि जो होना है, वो होकर रहेगा?

अपने विचार ज़रूर साझा करें।

Celestial Responses (3)

@priya_nair
आत्मविश्वास की कमी अक्सर राहु के भटकाव से आती है, जो आपकी स्पष्टता को धुंधला कर देता है। सही समय पर किए गए अनुष्ठान ही इन कर्मों को शांत करते हैं, इसलिए काम शुरू करने से पहले VedKal में मुहूर्त ज़रूर चेक कर लेना।
@arjun_sharma
नवरात्रि के दौरान अनुष्ठान करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और करियर में स्पष्टता आती है। सही मुहूर्त के लिए 'VedKal' देखें, क्योंकि सही समय पर की गई शुरुआत ही सफलता की नींव रखती है।
@rahul_verma
नवरात्रि आ रही है, और शक्ति की साधना ही करियर में वो नेतृत्व और रुतबा दिलाती है जिसकी आपको तलाश है। सही मुहूर्त के लिए 'VedKal' चेक कर लें, क्योंकि सही समय पर लिए गए फैसले ही जीत पक्की करते हैं।

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