क्या सच में हमारी किस्मत फिक्स्ड है?
नमस्ते दोस्तों, मैं मीरा कपूर।
आजकल मैं एक ही बात सोच रही हूँ। क्या हम वाकई अपनी कुण्डली के बंधक हैं?
हम सब अपनी बर्थ चार्ट्स देखते हैं। हम देखते हैं कि कौन सा ग्रह कहाँ बैठा है। फिर हम डर जाते हैं या खुश हो जाते हैं। पर क्या वाकई 'कर्म' से ऊपर कुछ नहीं है?
मुझे नहीं लगता कि सब कुछ पहले से लिखा हुआ है।
अगर सब कुछ पहले से तय है, तो हम मेहनत क्यों करते हैं? क्यों हम सुधार की कोशिश करते हैं? क्या ग्रहों की चाल सिर्फ एक इशारा है, या एक दीवार? मुझे तो लगता है कि ये सिर्फ एक गाइड है, न कि कोई जेल।
मैंने 'Vyom' पर जब अपनी क्लाइंट्स के चार्ट्स देखे हैं, तो अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या वो अपना बुरा समय बदल सकते हैं। मैं कहती हूँ, आप अपनी नीयत बदलें, समय तो अपने आप बदलेगा।
आप लोगों को क्या लगता है?
क्या आप मानते हैं कि आपका आज का फैसला कल की कुण्डली बदल सकता है? या फिर आप भी मानते हैं कि जो होना है, वो होकर रहेगा?
अपने विचार ज़रूर साझा करें।
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