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क्या मंगल का मेष राशि में होना वास्तव में साहस है या सिर्फ जिद?

क्या मंगल का मेष राशि में होना वास्तव में साहस है या सिर्फ जिद?

आज आकाश को देख रहा था। मंगल अपनी ही राशि मेष में बैठा है, अश्विनी नक्षत्र के पहले पाद में। सब कहते हैं ये बहुत ऊर्जावान समय है।

पर मुझे कुछ और महसूस हो रहा है।

क्या ये सच में आगे बढ़ने की शक्ति है, या हम बस बिना सोचे-समझे भाग रहे हैं?

अश्विनी नक्षत्र की शुरुआती ऊर्जा बहुत तीव्र होती है। ये वैसी ही है जैसे बच्चा पहली बार चलना सीखता है। गिरता है, चोट खाता है, पर रुकता नहीं।

मुझे याद है, पिछली बार जब मंगल ऐसी स्थिति में था, मैंने एक बड़ा फैसला जल्दबाजी में लिया था। नतीजे अच्छे नहीं थे।

इस बार मैं थोड़ा रुक गया हूँ।

जब ग्रह इतना बलवान होता है, तो हमारी बुद्धि अक्सर पीछे छूट जाती है। हम 'करना' चाहते हैं, पर 'क्यों करना है' ये भूल जाते हैं।

क्या आप भी ऐसा महसूस कर रहे हैं?

जैसे अंदर से कोई दबाव है कि कुछ न कुछ बदल दो।

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दबाव और दिशा के बीच बहुत छोटा फर्क होता है।

मंगल हमें जोश तो दे देगा, पर उस जोश का उपयोग धर्म के लिए करना है या बस अपना अहंकार बढ़ाने के लिए, ये चुनाव हमारा है।

सोचिए, कहीं ये ऊर्जा आपको कहीं गलत रास्ते पर तो नहीं ले जा रही?

बताइए, आपके साथ इन दिनों क्या हो रहा है?

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