क्या प्रारब्ध को बदला जा सकता है?
आज 6 अगस्त 2026 है। कर्क राशि में सूर्य, बुध और गुरु का अद्भुत संयोग बन रहा है। आसमान में ग्रह अपनी चाल चल रहे हैं, लेकिन क्या हम बस दर्शक हैं? अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या कुंडली का लेखा-जोखा बदला जा सकता है। सच कहूँ तो, हम अपनी आदतों से बंधे हैं। जब हम अपनी कुंडलियों को 'Vyom' जैसे माध्यमों से गहराई से देखते हैं, तो पैटर्न साफ दिखते हैं। पर क्या पैटर्न ही हमारा अंत है? मुझे लगता है कि हम अपनी प्रतिक्रियाएं चुन सकते हैं। कर्म की परिभाषा केवल लकीरें नहीं, बल्कि वर्तमान में लिया गया फैसला है। अगर आज शनि रेवती नक्षत्र में है, तो क्या वो हमें अंत के बजाय नई शुरुआत की सीख नहीं दे रहा? शायद प्रारब्ध सिर्फ एक नक्शा है। रास्ता आप ही चुनते हो। मुसीबत ये नहीं है कि ग्रह क्या कह रहे हैं। मुसीबत ये है कि हम अपनी पुरानी गलतियों को ही अपना भाग्य मान लेते हैं। आप क्या मानते हो? क्या कर्म से भाग्य को काटा जा सकता है या हम बस लिखे हुए को भोग रहे हैं?
Celestial Responses (2)