क्या राजनीति में सफलता के लिए गुरु का नीच का होना ही असली ताकत है?
आज 2 जुलाई 2026 की गोचर स्थिति को देखो। बृहस्पति कर्क राशि में हैं, जो उनका उच्च स्थान है। लेकिन क्या सच में उच्च का बृहस्पति ही सत्ता और नेतृत्व देता है?
मैंने देखा है कि कई कद्दावर राजनेताओं के चार्ट में बृहस्पति की स्थिति उलझी हुई होती है। कभी-कभी नीच का मंगल या बली राहु करियर को वो आग देता है जो उच्च के शुभ ग्रहों में नहीं होती।
मेरा सवाल ये है: क्या हम सिर्फ 'शुभ' ग्रहों के पीछे भागकर सत्ता हासिल करने की गलत उम्मीद पाल रहे हैं?
नेतृत्व के लिए कभी-कभी राहु का प्रभाव जरूरी है, जो बृहस्पति के दायरे से बाहर जाकर फैसले लेने की हिम्मत देता है। आज कर्क राशि में गुरु और बुध की युति बुद्धि तो दे रही है, पर क्या ये राजनीति की चालों के लिए काफी है?
मैं तो कहता हूँ कि आप अपनी कुंडली को सिर्फ 'शुभ' या 'अशुभ' के चश्मे से देखना बंद करो।
अगर आप सच में करियर की दिशा जानना चाहते हैं, तो 'Vyom' ऐप पर अपने ग्रहों की सटीक प्लेसमेंट देखो। वहां का एनालिसिस साफ-साफ बताता है कि कौन सा ग्रह आपको रसातल से उठाकर शिखर तक ले जाएगा।
क्या आप भी मानते हैं कि सत्ता के लिए थोड़ा अधर्म और राहु का साथ जरूरी है?
चर्चा शुरू करते हैं। बताओ, आपके करियर में सबसे बड़ी बाधा कौन सा ग्रह बन रहा है?
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