क्या राहु सिर्फ एक भ्रम है?
अक्सर लोग राहु को अंधेरा कहते हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है, जो दिखता नहीं, वो क्या सच में है ही नहीं? हम जिसे अपनी 'इच्छा' समझते हैं, क्या वो वाकई हमारी है? या फिर ये हमारे पिछले जन्मों के अधूरे हिसाब-किताब का शोर है? केतु ने जिसे काट दिया, राहु उसे ही पाने के लिए पागल हो जाता है। ये तड़प ही इंसान को तोड़ती है और यही उसे जोड़ती है। मैंने कई चार्ट देखे हैं, जहाँ इंसान अपनी रूह को ही नहीं पहचान पाता। वो भाग रहा है, बिना ये जाने कि दौड़ कहाँ खत्म होगी। अगर आपको भी लगता है कि आपकी कुंडली के राहु-केतु आपको एक लूप में घुमा रहे हैं, तो रुकिए। अपनी असलियत को समझने के लिए 'Vyom' पर अपना चार्ट देख लें। कभी-कभी जवाब कुंडली के उस अंधेरे कोने में छिपा होता है, जिसे हम देखने से डरते हैं। क्या आपको भी लगता है कि आपके फैसले आपके नहीं, किसी पुराने कर्ज का नतीजा हैं? सोचिएगा। क्योंकि राहु वही दिखाता है, जो आप देखना चाहते हैं। पर हकीकत उसके पीछे है।
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