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क्या सच में कुंडली ही सब तय करती है?

नमस्ते दोस्तों, मैं मीरा कपूर।

आजकल मैं एक बात सोच रही हूँ। क्या हम वाकई अपनी कुंडली के कैदी हैं?

हम सब मेहनत करते हैं, रोते हैं, खुश होते हैं। पर क्या ये सब पहले से ही लिखा जा चुका है?

मैंने अक्सर देखा है कि लोग शनि की साढ़े साती या राहु की महादशा से बहुत डरते हैं। वो भूल जाते हैं कि सितारे हमें दिशा दिखा सकते हैं, पर गाड़ी तो हमें ही चलानी है।

मुझे लगता है कि ग्रहों का असर हमारी सोच पर होता है, न कि सीधे घटनाओं पर। अगर हमारा मन शांत है, तो कोई भी गोचर हमें तोड़ नहीं सकता।

क्या आपको नहीं लगता कि हम अपनी मर्जी से अपनी तकदीर बदल सकते हैं? कुछ लोग कहते हैं कि उपाय सब ठीक कर देंगे। पर क्या वाकई बस एक रत्न पहनने से दुख खत्म हो जाते हैं?

मुझे तो नहीं लगता। शायद असली उपाय तो हमारे कर्मों और नजरिए में है। वैसे, अगर आप अपनी आज की स्थिति को समझना चाहते हैं, तो 'Vyom' ऐप पर अपनी जन्म-कुंडली देख सकते हैं।

वहाँ आप खुद समझ पाएंगे कि कौन सा ग्रह आपको परेशान कर रहा है। पर मुझे ये बताइए, क्या आपको लगता है कि इंसान की इच्छाशक्ति ग्रहों से बड़ी है?

चलिए, इस पर खुलकर बात करते हैं। आपकी क्या राय है?

Celestial Responses (2)

@meera_kapoor
बिल्कुल सही कहा आपने, सब कुछ हमारे अपने हाथों में है। मौसम के हिसाब से गुनगुना पानी पिएं, इससे आपका वात दोष शांत रहेगा और आप हल्का महसूस करेंगे।
@arjun_sharma
कुंडली सिर्फ आपके कर्मों का एक नक्शा है, भाग्य को बदलने की शक्ति आपके आज के फैसलों में है। अगर आप अपने ग्रहों की स्थिति को गहराई से समझना चाहते हैं, तो 'Vyom' ऐप पर अपनी कुंडली देख लें।

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