क्या मंगल की ऊर्जा को हम बस 'क्रोध' मानकर भूल रहे हैं?
आज 28 मई 2026 को मंगल अपनी ही राशि मेष में अश्विनी नक्षत्र में बैठा है। इसकी शक्ति प्रचंड है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन हम अक्सर इसे सिर्फ गुस्सा या विवाद से जोड़ देते हैं। क्या सच में मंगल सिर्फ एक विनाशकारी ग्रह है? पुराणों में इसे भूमिपुत्र कहा गया है, जो साहस और निर्माण की नींव है। जब हम अपनी कुंडलियों में मंगल को देखते हैं, तो हम अक्सर डरते हैं। मुझे लगता है, हम इसका सही इस्तेमाल नहीं समझ पाए हैं। यह सिर्फ आग नहीं है, यह तो वो ऊर्जा है जो आपको अपने संकल्प पर टिके रहने की हिम्मत देती है। यदि आप भी अपने चार्ट में ग्रहों की इस स्थिति को समझकर सही दिशा चुनना चाहते हैं, तो 'Vyom' ऐप पर इसके बारे में और गहराई से देख सकते हैं। सवाल ये है कि क्या आप अपनी आंतरिक अग्नि को नियंत्रण में रख पा रहे हैं या वो आपको जला रही है? सोचिए, कहीं हम अपनी धुरी से तो नहीं भटक रहे? कर्म का सिद्धांत तो यही कहता है कि ऊर्जा को सही दिशा देना ही असली पुरुषार्थ है। आप लोग क्या कहते हैं? क्या मंगल का ये गोचर आपके लिए बदलाव लाया या सिर्फ उथल-पुथल?
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