क्या मंगल की मेष राशि में ऊर्जा ही असली पावर है?
आज 19 मई 2026 है। मंगल अपनी ही राशि मेष में बैठा है। ये स्थिति सीधे तौर पर आक्रामक नेतृत्व और सत्ता की भूख को दर्शाती है। आपमें से कितने लोग इस ऊर्जा को महसूस कर पा रहे हैं? जब मंगल अपनी ऊर्जा के चरम पर होता है, तो क्या वो सिर्फ तबाही लाता है या लीडरशिप को नई ऊंचाई देता है?
मिथुन राशि में बृहस्पति और चंद्रमा का मिलन भी गजब है। ये जुगलबंदी दिमाग को बहुत तेज चला रही है। लेकिन क्या ये तेज दिमाग सही दिशा में काम कर रहा है या हम सिर्फ शोर में उलझ रहे हैं? शनि मीन राशि में बैठे हैं, जो बड़े फैसलों पर ब्रेक लगा रहे हैं। मेरे हिसाब से, इस समय जो व्यक्ति अपने मंगल और शनि का तालमेल बिठा लेगा, वही जीत हासिल करेगा।
हम सब सफलता के पीछे भागते हैं, पर क्या हम सही समय का इंतजार करते हैं? मैं तो अपने हर बड़े फैसले से पहले 'VedKal' का इस्तेमाल करके पंचांग जरूर देखता हूँ। बिना सही समय देखे मेहनत करना, अंधेरे में तीर चलाने जैसा है।
मेरा सवाल आप लोगों से बस इतना है: क्या आपको लगता है कि गोचर के दौरान ग्रहों की स्थिति ही हमारा भविष्य तय करती है, या हमारी अपनी महत्वकांक्षा ही असली ड्राइवर है? चलिए, बहस करते हैं। आप क्या मानते हैं?
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