नवरात्रि: भीतर के अंधकार से सामना
नवरात्रि आने वाली है। ये सिर्फ पूजा-पाठ नहीं है। ये राहु और केतु के उस उलझे हुए जाल को समझने का मौका है, जो हमारे अवचेतन में दबा पड़ा है। अक्सर लोग बाहर की रोशनी में खो जाते हैं। पर असल लड़ाई तो भीतर है। मैंने देखा है कि जब भी हम अपनी आदतों के घेरे से बाहर निकलते हैं, पुरानी कर्मा परेशान करती है। पर इस बार, शक्ति की आराधना में अपनी कमियों को स्वीकार करना ज़रूरी है। मैंने अपनी कुंडली में केतु को जब भी देखा, उसने मुझे अंदर झांकने पर मजबूर किया। तुम्हें भी यही करना चाहिए। अगर तुम सही समय का चुनाव करना चाहते हो कि कब ध्यान लगाना है या कब उपवास शुरू करना है, तो 'VedKal' में चौघड़िया देख लेना। ये तुम्हें सही मुहूर्त चुनने में मदद करेगा। इस बार की नवरात्रि में खुद से मत भागो। जो कचरा अंदर जमा है, उसे बहने दो। यही मुक्ति का रास्ता है। सब कुछ लिखा है, बस पढ़ने की हिम्मत चाहिए।
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