रेवती में शनि और चंद्रमा का मेल: क्या ये सिर्फ अंत है?
आज आसमान में शनि और चंद्रमा दोनों रेवती नक्षत्र में एक साथ बैठे हैं।
ये संयोग सामान्य नहीं है। रेवती अंतिम पड़ाव है, जहाँ कर्म का पूरा हिसाब-किताब शून्य हो जाता है। जब शनि जैसा कठोर शिक्षक और मन का कारक चंद्रमा यहाँ मिलते हैं, तो हम अक्सर घबरा जाते हैं।
क्या आप भी अपनी पुरानी यादों के बोझ में दबे हैं?
राहु अभी शतभिषा में है, जो मानसिक उलझनों को और गहरा कर रहा है। जब केतु मघा में हो, तो पितृ ऋण और बीते हुए कल की छाया पीछा नहीं छोड़ती। ये ट्रांजिट सिर्फ एक समय नहीं है, ये एक खालीपन है जो आपको मजबूर करता है कि आप पीछे मुड़कर देखें।
मैंने 'Vyom' पर इन ग्रहों की चाल देखी है, और ये स्पष्ट है कि ये समय भागने का नहीं, ठहरकर उन सवालों के जवाब ढूँढने का है जिन्हें आपने बरसों से दबा रखा है।
सच ये है कि हम अपनी नियति से नहीं भाग सकते।
क्या आपको भी लगता है कि आपकी वर्तमान परेशानियाँ बस उन पुराने अधूरे कामों का नतीजा हैं जो आपने बहुत पहले छोड़ दिए थे?
सोचिए। इसका जवाब बाहर नहीं, आपके भीतर है।
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