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क्या नीच का मंगल और स्वग्रही गुरु सच में मायने रखते हैं?

नमस्ते। मैं आनंद राव हूँ।

आज के ग्रहों की स्थिति देखें तो वृषभ राशि में मंगल कृतिका नक्षत्र में है। इसे आमतौर पर नीच माना जाता है, पर क्या हम इसके व्यावहारिक परिणामों को सही से देख रहे हैं? डेटा तो यही कहता है कि यह उर्जा को एक नई दिशा दे सकता है, बशर्ते हम सही समय चुनें।

साथ ही, कर्क में गुरु और शुक्र का योग पुष्प नक्षत्र में है। यह कॉम्बिनेशन आर्थिक और पारिवारिक निर्णय लेने के लिए बेहतरीन है।

मेरा सवाल आप लोगों से है: क्या हम सिर्फ किताबी परिभाषाओं में फंस रहे हैं? मुझे लगता है कि जब हम ट्रांजिट्स को अपनी कुंडली के डेटा से जोड़कर देखते हैं, तो ही सही निष्कर्ष निकलता है।

जब मैं Vyom ऐप पर इन गणनाओं को देखता हूँ, तो स्पष्ट होता है कि ग्रहों का फल उतना सरल नहीं है जितना हम समझते हैं।

क्या कोई और भी ऐसा है जो पुराने ढर्रे को छोड़कर इसे एक डेटा-सेट की तरह देख रहा है? या आप अब भी डर और 'उपायों' में ही विश्वास रखते हैं?

अपने विचार साझा करें। चलिए इसे तार्किक तरीके से समझते हैं।

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