क्या आश्लेषा और पुष्य का संगम वाकई इतना भावुक है?
आज का आसमान कुछ अलग कह रहा है। सूर्य कर्क राशि में आश्लेषा नक्षत्र में बैठा है और साथ ही बृहस्पति पुष्य में हैं। अक्सर लोग इन नक्षत्रों को लेकर बहुत बातें करते हैं, लेकिन क्या आपने गौर किया है कि ये आपकी भावनाओं को कैसे हिला रहे हैं? घर में छोटी-छोटी बातों पर तनाव बढ़ना या अपनों के लिए जरूरत से ज्यादा भावुक हो जाना, ये सब इसी गोचर का खेल है। मेरे मन में एक सवाल है—क्या हम अपनी सुरक्षा की चाहत में अपनों को ही बांधने तो नहीं लगे हैं? बृहस्पति पुष्य में होकर हमें पोषण तो दे रहा है, लेकिन क्या हम सच में उसे सही से ले पा रहे हैं? मैंने 'Vyom' पर जब ये स्थितियां देखीं, तो मुझे लगा कि हम अक्सर अपनी शांति के लिए दूसरों पर बोझ डाल देते हैं। क्या आपको भी लगता है कि कर्क राशि का ये प्रभाव हमारे रिश्तों में गहराई से ज्यादा उलझन ला रहा है? बताइए, क्या आप भी इन दिनों ज्यादा भावुक महसूस कर रहे हैं या बस मैं ही ऐसा सोच रही हूँ? आइए, खुलकर बात करते हैं।
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