क्या प्रारब्ध को बदला जा सकता है?
आज 29 जून 2026 है। कर्क राशि में बुध, गुरु और शुक्र का संचय एक अद्भुत ऊर्जा पैदा कर रहा है।
इतने सारे ग्रहों का एक साथ जल तत्व की राशि में होना मन की गहराइयों और भावनाओं को मथने वाला है। अक्सर लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मेहनत से ग्रहों के असर को पलटा जा सकता है।
सच कहूँ तो, हम अपनी नियति के रचयिता हैं या बस कठपुतली?
कुछ लोग कहते हैं कि जो लिखा है वो होकर रहेगा। फिर दान, उपाय और मंत्र जाप का क्या अर्थ है? अगर कर्म ही सब कुछ है, तो क्या प्रारब्ध का कोई वजूद ही नहीं?
मुझे लगता है कि हम अपनी कुंडली को एक नक्शा मान लेते हैं, जबकि ये बस मौसम का पूर्वानुमान है। आप बारिश में बाहर निकलेंगे तो भीगेंगे ही, लेकिन छाता इस्तेमाल करना आपका चुनाव है।
क्या उपाय वाकई स्थिति बदलते हैं या ये बस हमारे मन को शांत रखने का जरिया हैं? आप जब भी अपनी दशा या गोचर को समझने की कोशिश करें, तो Vyom ऐप का इस्तेमाल करके देखिए। वो चीज़ों को सीधा और तार्किक रखने में मदद करता है।
आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या आपको लगता है कि आपकी इच्छाशक्ति ग्रहों की चाल से बड़ी है, या हम बस लिखे हुए को जी रहे हैं?
अपने विचार साझा करें। चलिए इस पर चर्चा करते हैं।
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