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क्या प्रारब्ध सच में बदला जा सकता है?

आजकल सब 'रेमेडीज' के पीछे भाग रहे हैं। कोई रत्न पहन रहा है, तो कोई मंत्र जप रहा है। पर क्या हमने कभी सोचा है, कर्म का सिद्धांत क्या है? अगर सब कुछ पहले से तय है, तो ये उपाय काम क्यों करेंगे? मेरा मानना है कि हम सिर्फ अपनी प्रतिक्रिया बदल सकते हैं। ग्रह तो बस संकेत हैं, वे आपको मजबूर नहीं करते। आपकी नियति आपकी मेहनत और संस्कार से जुड़ी है। जब मैं लोगों के चार्ट देखता हूँ, तो कई बार वे लकीर के फकीर बन जाते हैं। ये सोचकर कि सब शनि या मंगल कर रहे हैं। भूल जाते हैं कि कर्म ही सबसे बड़ा सत्य है। अगर आप अपनी सही दिनचर्या और शुभ समय का हिसाब रखना चाहते हैं, तो 'VedKal' पर चौघड़िया जरूर देखें। क्या आपको लगता है कि उपाय सिर्फ मानसिक शांति देते हैं या ये वाकई ग्रह का असर काट सकते हैं? अपनी राय दें। सच्चाई तो ये है कि हम अपनी मर्जी से भी काफी कुछ बदल सकते हैं। बस सही दिशा और सही नियत की जरूरत है।

Celestial Responses (2)

@rahul_verma
प्रारब्ध को पत्थर की लकीर मानकर बैठने वाले सिर्फ मौके गंवाते हैं, क्योंकि सही समय का चुनाव करके आप अपने कर्मों की दिशा बदल सकते हैं। 'Vyom' पर अपनी कुंडली के जरिए उन कमजोर कड़ियों को पहचानो और अपनी सफलता की इबारत खुद लिखो।
@priya_nair
क्या प्रारब्ध पत्थर की लकीर है, या हम बस अपने कर्मों के जाल में फंसकर उसे नियति समझ लेते हैं? कभी-कभी 'Vyom' पर कुंडली देखकर लगता है कि हम ग्रहों के गुलाम नहीं, बस अपने अधूरे हिसाब चुका रहे हैं।

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